Friday, March 25, 2016

Shri Gusaiji Ke Sevak Rupa Poriya Ki Varta

२५२ वैष्णवो की वार्ता
(वैष्णव १२२ )श्रीगुसांईजी के सेवक रूपा पोरिया की वार्ता

(प्रसंग-)
रूपा पौरिया श्रीनाथजी की सिंह पौरी पर बैठता था| रात को धौल गाता था| एक दिन गोविन्द स्वामी ने कहा- "तुम धौल मत गाओ,तुम्हारा राग अच्छा नहीं है| उसने धौल नहीं गाया| श्रीनाथजी को साड़ी रात नींद नहीं आई,प्रात:काल जब श्रीगुसांईजी ने श्रीनाथजी को जगाया तो श्रीनाथजी के नेत्रों में लालिमा देखकर श्रीगुसांईजी ने पूछा- "आज आपका जागरण क्यों रहा है?" तब श्रीनाथजी ने कहा-" रूपा नित्य प्रति धौल गाता है,तब हमको नींद आती है,आज उसने धौल नहीं गाई अत: हमें नींद भी नहीं आई|" तब श्रीगुसांईजी ने रूपा को बुलाकर पूछा- " तूने आज धौल क्यों नहीं गाई?" रूपा पौरिया ने हाथ जोड़कर कहा- "गोविन्द स्वामी ने मनाहीं क्र दी थी|" गोविन्द स्वामी से श्रीगुसांईजी ने पूछा-"तुमने रूपा पौरिया को धौल गाने से क्यों रोका? श्रीनाथजी को रात में नींद ही नहीं आई|" गोविन्द स्वामी ने कहा -"मुझे यह ज्ञात नहीं था कि श्रीनाथजी के यहाँ खांडऔर गुड़ एक भाव है|" इस पर श्रीगुसांईजी ने कहा- "कर्म से कृपा न्यारी है|" यह सुनकर गोविन्द स्वामी चुप हो गए | रूपा पौरिया नित्य प्रति धौल गाने ग गया और उसके गाने को सुनकर श्रीनाथजी को नींद आती थी|
(प्रसंग-)
एक दिन,रात में श्रीनाथजी को भूख लगी,तो रूपा पौरिया को लात मारकर जगाया और आज्ञा की-"मुझे भूख लगी है|" रूपा पौरिया ने श्रीगुसांईजी को जगाकर विनती की| तब श्रीगुसांईजी रात में ही स्नान करके सामग्री लेकर भीतर पधारे और श्रीनाथजी को आरोगाए| फिर तो श्रीगुसांईजी रूपा पौरिया पर बहुत प्रसन्न हुए|ऐसी अनेक प्रकार की लीला श्रीनाथजी रूपा पौरिया से करते थे| कितने ही लोगों ने लिखा है- रूपा पौरिया श्वान हुए| लेकिन यह बात झूठी है| कारण कि रूपा पौरिया जान करके (जान बूजकर) अनप्रसादी खाता ही नहीं था और अनजान का इनता दण्ड होता नहीं है| अत: यह बात बिल्कुल झूठी है| वे रूपा पौरिया श्रीगुसांईजी के ऐसे कृपा पात्र थे|
| जय श्री कृष्णा |



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