Friday, October 9, 2015

Shri Gusaiji Ke Sevak Bhavnagar Vasi Brahman Ki Varta


२५२ वैष्णवों की वार्ता
( वैष्णव ६७ ) श्रीगुसांईजी के सेवक भावनगर वासी ब्राह्मण की वार्ता



एक बार श्रीगुसांईजी दक्षिण में पधारे तो भावनगर में उस ब्राह्मण को वेद पढ़ाते देखा | श्रीगुसांईजी ने विचार किया -" यह ब्राह्मण बहुत अच्छा वेद का पाठ करता है , परन्तु अर्थ नहीं समझता है , यदि यह अर्थ भी समझे तो बहुत अच्छा रहे | इतने में ही उस ब्राह्मण के मन में आया कि " मै श्रीगुसांईजी के शरणागत हो जाउँ |" वह ब्राह्मण श्रीगुसांईजी की शरण में गया | कथा सुनने लगा | श्रीगुसांईजी की कृपा से उस ब्राह्मण को वेद का अर्थ स्फुरित होने लगा | वह ब्राह्मण श्रद्धा सहित वेद का पाठ करने लग गया | एक दिन श्रीनाथजी ने श्रीगुसांईजी को आज्ञा की -" इस ब्राह्मण को हमारे निज मन्दिर के आगे वेद पाठ कराओ |" श्रीठाकुरजी की आज्ञा की अनुपालना में वह ब्राह्मण निज मन्दिर के आगे श्रृंगार से राजभोग तक वेद पाठ करने लगा | कही अक्षर व् मात्रा में भूल होती तो श्रीठाकुरजी आकर बताते थे | वह ब्राह्मण ऐसा कृपा पात्र था |

।जय श्री कृष्ण।
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2 comments:

  1. Jay shree krishna. Shree Gosainji paramdayal ki Jay

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  2. Jay shree krishna. Shree Gosainji paramdayal ki Jay

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