Monday, April 18, 2016

Shri Gusaiji Ke Sevak Nihalchandjalota Kshtriy Ki Varta

वैष्णवो की वार्ता
(वैष्णव १३०)श्रीगुसांईजी के सेवक निहालचंदजलौटा क्षत्रिय की वार्ता

निहालचंद जलोटा उज्जैन के निवासी थे| पुष्टिमार्गीय ग्रन्थों के श्रवण में उनकी बहुत आसक्ति और आस्था थी । श्रीठाकुरजी भी उनको अनुभव कराते रहते थे । एक समय की बात है - ये निहालचंद श्रीगोकुल के लिए चल दिए| मार्ग में इनका सोलह व्यापारियों का साथ हो गया । चोरों ने मार्ग में से व्यापारियों के साथ ही निहालचन्द का अपहरण कर इन्हें कैद कर लिया । चोरों ने इन्हें मार डालने का निश्चय किया । चोरों का जो मुख्य पटेल (मुखिया) था, उसकी माँ वैष्णव थी । चाचा हरिवंशजी ने भीलों के जिस गाँव को वैष्णव बनाया था, वस उसी गाँव की बेटी थी । एक दिन रात में उसने कीर्तन की ध्वनि सुनी, कयोंकि निहालचंद भाई रात्रि के समय कीर्तन करते थे । पटेल की माँ रात्रि में निहालचंद के कैद खाने के निकट गई और उससे उनका नाम गाँव व स्थान पूछा जैसे ही इन्होंने अपना नाम लिया,वृद्धा की श्रद्धा उमड़ पड़ी । उसने वैष्णवों से निहालचंद का गुणगान पहले से ही सुन रखा था । उसने अपने बेटे को बुलाकर उन्हें कैद खाने से बाहर निकाला । उनसे अपने बेटे को क्षमा कराया । समस्त गाँव को वैष्णव दीक्षा दिखाई । श्रीगुसांईजी को गाँव से भेंट दिलाई । निहालचंद ने उन चोरों से कहा कि वे चोरी का निंदित कार्य छोड़कर खेती करना प्रारम्भ करें । निहालचंद ने साथ के सोलह व्यापारियों को भी मुक्त करा दिया । वहाँ से निहालचंद उन व्यापारियों के साथ श्रीगोकुल आए । वे सोलह व्यापारी भी वैष्णव हुए । वैष्णवों के पास जो माल था, वह सब उन्होंने श्रीगुसांईजी को भेंट कर दिया । वे निहालचंद ऐसे कृपा पात्र थे जिनके साथ से भोलीं का गाँव और सभी व्यापारी वर्ग वैष्णव हो गया |
| जय श्री कृष्णा |



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