Monday, May 9, 2016

Shree Gusaiji Ke Sevak Stri-Purush Ki Varta

२५२ वैष्णवो की वार्ता
(वैष्णव१३७ )श्रीगुसांईजी के सेवक स्त्री- पुरुष की वार्ता

एक गाँव में श्रीगुसांईजी के सेवक दोनों स्त्री पुरुष श्रीठाकुरजी की सेवा पधराकर सेवा करते थे| एक दिन वह स्त्री अपने पड़ौसी के घर गई, वहाँ उसकी समृध्धि देखकर उसने पूछा-" तुम किसकी उपासना करते हो|" वह पड़ौसिन स्त्री बोली -"हम तो देवी की पूजा करते है, इन्ही की कृपा से हमारे यहाँ सभी प्रकार की मौज विधमान है|" वैष्णव स्त्री ने कहा -" तुम्हारी कृपा हो जावे तो कुछ दिन तुम्हारी देवी की पूजा, हम लोग कर ले| हमारे यहाँ भी समृध्धि होगी तो हम तुम्हे लौटा देंगे|" पड़ौसिन स्त्री ने स्वीकृति दे दी अंत: वैष्णव स्त्री देवी की मूर्ति घर में ले आई और अपने पति से कहा -" देवी की पूजन का सामान ले आओ|" वह वैष्णव पैसा (खेरीज) बेचने का कार्य करता था अत: थैली रखता था| एक पसारी की दुकान पर देवी की पूजा का सामान लेने गया| सामान की हड़बड़ाहट में उस वैष्णव ने अपने पैसो की थैली वही छोड़ दी और दुकानदार के रुपियो की थैली को लेकर चल दिया| दुकानदार को जब ज्ञात हुआ तो उसने उसका पीछा किया और उसे थैली सहित पकड़वा दिया| हाकिम के पास ले गया हाकिम ने दुकानदार की थैली से उसकी पैसो की थैली बदलवा दी और इस गलती की सजा के रूप में उसे गधे के ऊपर बैठाकर नगर परिक्रमा लगवाई| जब वह घर पहुँचा तो उस वैष्णव के मन में आई-" मैंने अपने श्रीठाकुरजी का तिरस्कार करके इस देवी को घर में पधराया है| मैंने अन्याश्रय किया है| उसी की सजा प्राप्त हुई है| अत: उसने उसी समय देवी की मूर्ति पड़ौसी के यहाँ भेजी और अपने श्रीठाकुरजी की सेवा करने लगा| वैष्णव को अन्याश्रय नहीं करना चाहिए| उसे अन्याश्रय बाधा देता है अन्याश्रय से अनिष्ट होता है| श्रीठाकुरजी अप्रशन्न होते है| अत:अन्याश्रय नहीं करना चाहिए| अत: वे स्त्री पुरुष ऐसे कृपा पात्र थे कि जिन्हे अन्याश्रय छुड़ाकर श्रीठाकुरजी बोलने लगे|

| जय श्री कृष्णा |
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1 comments:

  1. Yah kahna galat hoga ki kisi yadi app thakur ji ki puja karta hai sewa karta hai Or devi ki puja karna se Thakur ji naraaj ho jata hai galat baat hai Vo to Sab sansaar k malik hai chaha thakur ji ho Ya Devi Maiya ho Thakur Ji sansaar k Palanhaar hai Or Devi Maiya Sarv Bharmand Ki Ham Dono ki puja karta hai Devi or Thakur ji Aaj tak 20 saal se Utaar Chadhav sab dekha lekin ye Daya Nidhi hai Karunamayi Hai Aisa kahna ki Kisi or ki puja se Nuksaan Uthana Padta hai galat hai Shakti Ka sanchar Dono Raaho se Hota hai isliya Kabhi kisi shakati ka Niradar nahi karna chahiya Ham devi ki puja karta hai or ab sath me thakur ji ki bbe lekin koi bhe samasya samna nahi aayi is liya Sarv Dev puja vidhan par he garsar rahe Jai mata Di Hare Krishna Hare Krishan

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