Monday, May 18, 2015

Shri Gusaiji Ke Sevak Krushnadas Tatha Ishwardas Ki Varta

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव ३३)श्रीगुसांईजी के सेवक कृष्णदास तथा ईश्वरदास की वार्ता


कृष्णदास तथा ईश्वरदास दोनों भाई निष्किंचन थे और श्रीगुसांईजी के पास रहकर जलधरा की सेवा करते थे| दोनों भाई अफीम बहुत खाते थे| श्रीगुसांईजी परदेश जाते तो इन्हें साथ ले जाते थे| एक दिन श्रीगुसांईजी ने इन्हें अफीम खाते देख लिया तो उन्होंने इसे छोड़ने की आज्ञा दी| उन्होंने श्रीगुसांईजी से पूछा-"अफीम खाने में क्या दोष है?" श्रीगुसांईजी ने आज्ञा की-" अफीम भगवत स्वरूप को भुलाती है| पुरुषार्थ को घटाती है और तत्व निश्चय को भुलाकर अतत्व में मन लगाती है| अफीम खाने वाले को जब तक अफीम नहीं मिले तब तक कहीं भी चित्त नहीं लगता है|" यह सुनकर उन दोनों ने अफीम खाना छोड़ दिया| अब तो वे दोनों भाई भगवत रस में लीन रहने लगे| उन्हें भगवत रस का अमल रहने लगा| दोनों भाई ऐसे भगवदीय श्रीगुसांईजी के कृपा पात्र थे|

।जय श्री कृष्ण। 
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3 comments:

  1. jai shree krishana
    khuaj sundar

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  2. Jai shree Krishna. shree girirajdharan ki jai. Shrinathji pyare ki Jai

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