Monday, March 16, 2015

Shree Gusaiji ki Sevak Ek Brajvasi ki Bahu Ki Varta

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव - १५ )श्रीगुसांईजी की सेवक एक ब्रजवासी की बहू की वार्ता





जिस दिन वह बहू श्वसुर गृह में आई , उसी दिन श्वसुर गृह से एक भैंस खो गई| सभी घर वाले कहने लगे -"बहू का पाँव घर में अच्छा नहीं पड़ा है : जिस दिन को यह आई है, उसी दिन हमारी भैंस खो गई|" बहू के मन में बहुत चिन्ता व्याप्त हुई अतः उसने श्रीनाथीजी के लिए सवासेर माखन की मनौती की| इसके पॉँच - सात दिन बाद ही भैंस पुनः प्राप्त हो गई। वह बहू भैंस के दही को बिलौने लगी, प्रति दिन एक छटांक माखन चुराने लगी| दूसरे दिन उस माखन को ताजा में मिलाकर ताजा निकाल लेती थी| इस प्रकार करते करते जब सवा सेर माखन पूरा हुआ तो श्रीनाथजी को आरोगवाने के लिए चली| घर से निकली तो उसे विचार हुआ - " मुझे कोई देख लेगा तो क्या कहेगा?" यह विचार आते ही उसकी यह गति हो गई न तो आगे ही बढ़ा जाएं और न पीछे ही आया जाए ।" श्रीनाथजी ने जब उसे इस प्रकार चिन्तातुर देखा तो श्रीनाथजी स्वयं पधारे, और उसका माखन लेकर स्वयं ही आरोगे । वह बहू ऐसी कृपा पात्र थी|

।जय श्री कृष्ण। 
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1 comments:

  1. This is great! But is this blog possible in English as well??

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