Wednesday, May 6, 2015

Shri Gusaiji Ke Sevak Madhukar Shahraja Ki Varta

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव ३०)श्रीगुसांईजी के सेवक मधुकर शाहराजा की वार्ता


मधुकर शाह ओड़छा नगर का राजा था| श्रीगुसांईजी एक बार ओड़छा पधारे थे तो वह सेवक हुआ था| राजा श्रीठाकुरजी की सेवा करने लगा| जो भी वैष्णव आता था राजा उसका बहुत सत्कार करता था| जो भी कोई कंठी-बंध व्यक्ति आता था तो राजा उसके चरण स्पर्श करता था और पैर धोता था| उसके परिवार वाले उसकी हंसी(मश्करी) करते थे| एक दिन राजा के काका ने एक गधा मँगाकर, उसको दस-बीस कण्ठी पहना कर और तिलक करके राजा के पास भेजा| राजा ने गदर्भ के चरण स्पर्श किए| पगधोए और चरणमृत लिया| राजा का शुद्ध भाव देखकर श्रीठाकुरजी उसी समय प्रकट हुए और राजा को दर्शन दिये| राजा को आज्ञा की - " कुछ माँग लो|" मधुकर शाह ने माँगा - " प्रभो, मेरा ध्यान वैष्णवो में ऐसा ही प्रेम मय बना रहे| वैष्णव भाव की कृपा से ही आपने मुझ को दर्शन दिये है|" श्रीठाकुरजी ने प्रसन्न होकर कहा-" तेरा भाव वैष्णवों में ऐसा ही रहेगा|" मधुकर शाह श्रीगुसांईजी के ऐसे कृपा पात्र थे|

।जय श्री कृष्ण।


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1 comments:

  1. यहाँ पर राजा मधुकर शाह को गुसाँई दी का सेवक बताया जा रहा है , राजा मधुकर शाह अोरछा में श्री हरिराम जी व्यास के शिष्य थे और हरिराम व्यास ही वहाँ के राज गुरु थे , श्री हरिराम व्यास के स्वंय प्रगट ठाकुर " श्री युगल किशोर 'आज भी पन्ना ( मध्यप्रदेश ) में विराजमान है . हरिराम व्यास स्वंय में बहुत विद्वान थे , भक्तमाल में उनका पूरा वर्णन है . हाँ ये कहना उचित हो सकता है , के राजा का वैष्णव आचार्यों में बहुत निष्ठा भाव था , कृपया उचित जानकारी दें ! जानकारी देनें वाले हरिराम व्यास के १४ वीं पीड़ी से है , स्थान - किशोर बन , वृन्दावन , ९९२७०९१८९९

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