Friday, June 10, 2016

Shri Gusaiji Ke Sevak Ek Kshtrani Ki Varta

२५२ वैष्णवो की वार्ता
(वैष्णव-१५०)श्रीगुसांईजी के सेवक एक क्षत्राणी की वार्ता

वह क्षत्राणी श्रीगुसांईजी के पास नाम सुनने के लिए बैठी लेकिन उसको अष्टाक्षर मंत्र नहीं आया। श्रीगुसांईजी ने उस क्षत्राणी से पूछा - "तुझे मेरा नाम याद है?" उसने "हाँ" में उतर दिया। श्रीगुसांईजी ने आज्ञा की -"इसी नाम की जाप कर|" वह क्षत्राणी रात दिन श्रीगुसांईजी का नाम जपती रहती थी| इस नाम के जप से श्रीनाथजी उस पर प्रशन्न हो गए| और उसे दर्शन दिये| उसके घर आकर माखन मांगते थे तथा दूध आरोगते थे| वह क्षत्राणी श्रीगुसांईजी की ऐसी कृपा पत्र थी|
|जय श्री कृष्णा|



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