Monday, January 19, 2015

(वैष्णव - २ ) श्री गुसाईंजी के सेवक गोपालदास सेगल शत्रिय की वार्ता

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव - ) श्री गुसाईंजी के सेवक गोपालदास सेगल शत्रिय की वार्ता 

गोपालदास नन्द गाँव में रहा करते थे । एक दिन श्रीगुसाईजी नन्दगाँव में पधारे तो गोपालदास ने उन्हें अपने घर ठहराया । घर में जो कुछ भी था, सर्वस्व समपर्ण कर दिया । इसके बाद वे एक म्लेच्छ की नौकरी करने लग गए । गोपालदास वैष्णवों की सेवा में म्लेच्छ का धन खर्च कर देते थे । लोगों ने म्लेच्छ को चुगली करके गोपालदास को नौकरी से हटवाना चाहा । लेकिन म्लेच्छ ने लोगों से कहा - " इसके भाग्य से ही मेरा द्रव्य दिनों - दिन बढ़ रहा है । यह सांसारिक भोगों में खर्च न करके परमार्थ में खर्च करता है । अत : इसे नौकरी से हटाना संभव नहीं है । सो वो गोपालदास ऐसे कृपा पात्र थे , जिनके संग से म्लेच्छ की बुद्धि भी निर्मल हो गई ।  
| जय श्री कृष्ण |  
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