Sunday, January 10, 2016

Shri Gusaiji Ke Sevak Madhavdas Kapur Ki Varta

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव ९७)श्रीगुसांईजी के सेवक माधवदास कपूर की वार्ता

वे माधवदास कपूर आगरा में रहते थे| एक बार श्रीगुसांईजी आगरा पधारे तो जनार्दनदास चौपड़ा के घर पर उतरे थे| वहां जब माधवदास दर्शन करने गए तो उसे साक्षात श्रीगोवर्धननाथजी के दर्शन हुए| माधवदास दर्शन करके बड़ा विस्मित हुआ और विनती कर बोला-" महाराज मुझे अपनी शरण में लो|" श्रीगुसांईजी ने कृपा करके उसे नाम निवेदन कराया| उसे सेवा पधरा दी| माधवदास श्रीठाकुरजी की सेवा करने लग गए| उसे श्रीठाकुरजी की लीला का अनुभव हुआ| कभी तो श्रीनाथजी रासलीला का अनुभव कराते, कभीदान लीला कराते दिखाई देते तो कभी बाल लीला का अनुभव जताते| ऐसी अनेक लीलाओ के दर्शन माधवदास को होते थे| माधवदास श्रीगुसांईजी के ऐसे कृपापात्र थे|


।जय श्री कृष्ण।


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2 comments:

  1. जय श्री कृष्णा।यमुनाजी की जय। महाप्रभुजी की जय।गोसाईंजी परम दयाल की जय।गुरुदेव जी प्यारे की जय

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  2. जय श्री कृष्णा।यमुनाजी की जय। महाप्रभुजी की जय।गोसाईंजी परम दयाल की जय।गुरुदेव जी प्यारे की जय

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