Thursday, June 4, 2015

Shri Gusaiji Ke Sevak Nihalchand Jalota Kshtriya Ki Varta

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव ३८)श्रीगुसांईजी के सेवक निहालचंद जलौटा क्षत्रिय की वार्ता



निहालचंद जलौटा उज्जैन के निवासी थे| पुष्टिमार्गीय ग्रंथो के श्रवण में उनकी बहुत आसक्ति और आस्था थी| श्रीठाकुरजी भी उनको अनुभव कराते रहते थे| एक समय की बात है- ये निहालचंद श्रीगोकुल के लिए चल दिए| मार्ग में इनका सोलह व्यापारियों का साथ हो गया| चोरो ने मार्ग में से व्यापारियों के साथ ही निहालचंद का अपहरण कर इन्हे कैद कर लिया| चोरो ने इन्हे मार डालने का निश्चय किया| चोरो का जो मुख्य पटेल (मुखिया) था, उसकी माँ वैष्णव थी| चाचा हरिवंशजी ने भीलों के जिस गाँव को वैष्णव बनाया था, वह उसी गाँव की बेटी थी| एक दिन रात में उसने कीर्तन की ध्वनि सुनी, क्योकि निहालचंद भाई रात्रि के समय कीर्तन करते थे| पटेल की माँ रात्रि में निहालचंद के कैद खाने के निकट गई और उससे उनका नाम गाँव व स्थान पूछा| जैसे ही इन्होने अपना नाम लिया, वृद्धा की श्रद्धा उमड़ पड़ी| उसने वैष्णवों से निहालचंद का गुणगान पहले से ही सुन रखा था| उसने अपने बेटे को बुलाकर उन्हें कैद खाने से बहार निकाला| उनसे अपने बेटे को क्षमा कराया| समस्त गाँव को वैष्णव दीक्षा दिखाई| श्रीगुसांईजी को गाँव से भेँट दिलाई| निहालचंद ने उन चोरों से कहा कि वे चोरी का निंदित कार्य छोड़कर खेती करना प्रारम्भ करें| निहालचंद ने साथ के सोलह व्यापारियों को भी मुक्त करा दिया| वहाँ से निहालचंद उन व्यापारियों के साथ श्रीगोकुल आए| वे सोलह व्यापारी भी वैष्णव हुए| वैष्णवो के पास जो माल था, वह सब उन्होंने श्रीगुसांईजी को भेंट कर दिया| वे निहालचंद ऐसे कृपा पात्र थे जिनके साथ से भीलों का गाँव और सभी व्यापारी वर्ग वैष्णव हो गया|


।जय श्री कृष्ण। 
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