Thursday, January 29, 2015

(वैष्णव - ५ ) श्री गुसाईंजी के सेवक भूधरदास की वार्ता

२५२ वैष्णवों की वार्ता
(वैष्णव - ) श्री गुसाईंजी के सेवक भूधरदास की वार्ता 
 

भूधरदास वैष्णव बाराडी में रहते थे । श्रीगुसाईजी जब द्वारिका पधारे तब भूधरदास उनके सेवक हुए । वे श्रीगुसाईजी के साथ द्वारिका भी गये थे । रास्ते में एक मुकाम हुआ, वहाँ भूधरदास के मन में विचार आया की श्रीगुसाईजी कोई माहात्मय व् चमत्कार दिखावें तो अच्छा रहे । इतने में ही बादल की घटा उमड़ी । चारों और गर्जना होने लगी । उस समय तक रसोई आधी बन पाई थी । श्रीगुसाईजी ने बादल को आज्ञा की - " तुम यहाँ मत बरसना । हमारे डेरा को छोड़कर बरसना । उसी समय वर्षा होने लगी । लेकिन श्रीगुसाईजी के डेरा से सौ - सौ हाथ दूर रहकर घनघोर वर्षा हुई । ऐसी वर्षा हुई की तालाबों में बारह महीना तक के लिए पानी इक्ट्ठा हो गया । नदियों में बाढ़  सी आ गई । लेकिन श्रीगुसाईजी के डेरा में एक बूंद भी नहीं आई । चारों और की वसुधा जल मयी हो गई । भूधर ने उनका चमत्कार देखा और माहात्मय समझा तथा उसने जीवन पर्यन्त श्रीगुसाईजी की सेवा करने का संकल्प ले लिया । श्रीगुसाईजी श्रीगोकुल में आ गए और भूधरदास को श्रीनाथजी की सेवा में रख दिया । थोड़े ही दिनों में श्रीनाथजी भूधरदास से बोलने लग गए । भूधरदास श्रीगुसाईजी के ऐसे कृपा पात्र थे । 
 
।जय श्री कृष्ण।
 
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